मुरारी कुमार मयंक (सहरसा)
सरकार गिराने का मकसद बिल्कुल भी न तो बिहार के हित से जुड़ा हुआ हैं न ही इनके पार्टी जेडीयू से।ये जुड़ा हुआ नीतीश कुमार के राजनीतिक कैरियर से।
नितीश कुमार जब बीजेपी के साथ थे और जब बीजेपी के साथ नहीं हैं ऐसा उनके स्टेटमेंट से ही जनता को समझ आने लगा हैं। जब मुख्यमंत्री जी बीजेपी के साथ थे और देश में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति का चुनाव होने वाला था तो इनको राज्यसभा नहीं जाने का दुःख होने लगा, जब बीजेपी से हट गए तो इनको जो 2014 में आया 2024 में नहीं आते हुए दिख रहा हैं।मतलब साफ हैं कि बीजेपी के साथ रहकर उपराष्ट्रपति बन कर सत्ताइस तक अपना कैरियर सुरक्षित करना था और विपक्ष में जा कर प्रधानमंत्री बनने का दिवा स्वप्न देख रहे हैं।लेकिन अपने स्वार्थ के लिए पता नहीं क्या क्या बोलवाए और जितना बात बोले जनता को बिलकुल उस बात पर भरोसा नहीं हैं क्योंकि बीजेपी इनके हमेशा से नजायज मांगो को पूरा करते रही तो नजयाज मांग फिर होगा ही।स्वार्थी कुमार जी का मांग था बिहार से जितना मंत्री केंद्र में बीजेपी का बनेगा उतना ही जेडीयू से बनना चाहिए इसके पीछे का दलील इनका ये था कि राज्य के जातीय समीकरण को साधना हैं क्योंकि आदत तो था हि नजायज मांगे मांगने का ये मांगे पूरी हुई नहीं बीजेपी कर भी देती लेकिन NDA के घटक दल में जेडीयू के अलावे शिवसेना भी थी तो उनको क्या जवाब देते अगर इनको देते तो उनको भी देना होता तब बीजेपी से कितना मंत्री बन सकता ये सोच कर इनके नजायज मांगे नहीं माना गया।उसके बाद #RCP सिंह को बलि का बकरा बनाया गया।कहा तो ये भी जाता हैं कि मुख्यमंत्री जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अंतिम समय में ये भी कहा कि अगर आरसीपी को मंत्री केंद्र में बनाया जाता है तो ललन सिंह बुरा मान जाएगा।...आगे पढ़ने के लिए मेरे ब्लॉग्स पर आए
बिहार के जनता के उम्मीद पूरा करे इसी उम्मीद के साथ चार वार के चुनाव में आठ वार मुख्यमंत्री बनने पर आपको बधाई।
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