05 March, 2022

बेटी हूँ बेकार नहीं।Beti Hun Bekar Nhi

महत्वपूर्ण लेख, ऐसय, निबंध।

नमस्ते।

मंच पर बैठे यूनिवर्सिटी के गुरुजन,हमारे चैयरमेन,अपने गुरुजन,महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्य, इस सभागर में उपस्थित सभी जेस्ट श्रेस्ट अभिभावक गण एवं मेरे सहपाठी।

 मैं ...अपना नाम हूँ,मैं ....विषय से स्नातक पास करने के बाद अपने ..... कॉलेज से ...विषय में अध्ययन रत हूँ।

आज की सदी में भी बहुत से लोग बेटी को बोझ समझते हैं लेकिन बेटी मतलब एक प्यारी सी मुस्कान, बेटी मतलब पापा का गुमान,बेटी मतलब खिलखिलाता फुल, बेटी मतलब अपना भविष्य और क्या कहे बेटी मतलब क्या होती हैं। वो तो बस वाही जानता हैं जिसे बेटी होती हैं। 


किसी कवि ने क्या खूब लिखा हैं।बहुत छोटा सा सफ़र होता है बेटी के साथ,बहुत कम वक्त के लिये वह होती हमारे पास…!!असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी,समझो भगवान् का आशीर्वाद है बेटी!बहुत से लोग तो पूजा – पाठ , व्रत इत्यादि भी इसीलिए करते है की उन्हें पुत्र की प्राप्ति हो । यहां तक की लोग तो जन्म से पहले लिंग जांच करवाने से भी पीछे नहीं हटते।

आज हमारा देश हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है | लेकिन महिलाओं को सम्मान देने के मामले में यह आज भी पीछे है । आज भी हमारे देश में पुरुषो को हर क्षेत्र में महिलाओ से बेहतर समझा जाता है।हम यूँ तो न्यूज़ चैनल्स , अखबारों में बहुत बड़ी- बड़ी बाते करते हैं लेकिन हमारे समाज में औरतों का कितना सम्मान किया जता है यह तो हम सभी जानते है । बहुत ही कम ” माँ – बाप ” ऐसे होते हैं जो की बेटी के जन्म पर खुश होते है।लोग कहते हैं की पुत्र होगा तो हमारा नाम रोशन करेगा , हमारा वंश चलाएगा । ऐसे लोगों को तो मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा की क्या कल्पना चावला ,पी वी सिंधु , सायना नेहवाल यह सब बेटियां नहीं , क्या इन्होंने अपने माँ बाप का नाम रोशन नहीं किया । लोग यह क्यों भूल जाते है की वंश चलाने के लिए भी स्त्री की ही आवश्यकता होती है ।क्या आप बिना महिलाओ के किसी समाज की कल्पना भी कर सकते है …????

नहीं ना। मैं भी नहीं कर सकता । असल मे बिना महिलाओं के हमारा कोई अस्तित्व है ही नहीं महिलाएं है बेटियां है।तभी तो हम हैं ।हमारी संस्कृति में बेटी को लक्ष्मी का रूप कहा जाता है । स्त्री को शक्ति का प्रतीक समझा जाता है ।एक औरत कितनी महान होती है यह शब्दों में बयां करना असम्भव है ।एक औरत एक बेटी , एक पत्नी , एक दोस्त , माँ , बहन आदि के रूप में हमारा साथ देती है तो हमारा भी फ़र्ज़ बनता है की हम भी महिलाओं का सम्मान करें ।

बेटियों का जन्म होना तो ऐसे मान लिया जाता है जैसे कोई बहुत बड़ी विपदा आ पड़ी हो, लेकिन उन्हें क्या पता आप ने भी जब जन्म लिया होगा तो किसी की बेटी (Beti) की कोख से ही लिया होगा.Betiyan तो आने वाला सुनहरा कल होती है, उनकी हमेशा इज्जत करनी चाहिए और सम्मान देना चाहिए. आज पुरुष प्रधान समाज होने के बावजूद भी बेटियां पुरुषो के साथ हर छेत्र में कंधे से कंधा मिला कर चल रही है बल्कि उनसे कही ज्यादा अच्छा काम कर रही है।बहुत सालो पहले महिलाओं को बराबर दर्जा मिलता था।उस समय महिलाओ को आज़ादी थी।लेकिन कुछ समय बाद उनकी आज़ादी काम हो गयी।क्योंकि कही न कही पुरुषों को एक डर था कही महिलाएं उनसे ऊपर न उठ जाए।तभी से महिलाओं को दबाना और शोषण करने शुरू कर दिया गया।लेकिन आज के दौर में महिलाओं का नया रुप सामने आ रहा हैं।शिक्षा की जहा तक बात की जाए तो ये एक महत्वपूर्ण कदम है समाज में बदलाव लाने के लिऐ।

शिक्षा एक संपूर्ण व्यक्तित्व का दर्पण है।शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नही होना चाहिए।अच्छे संस्कार , अच्छा व्यवहार, अच्छे विचार और अच्छी सोच बहुत जरूरी है समाज में।इंसान अच्छा या बुरा सिर्फ अपनी सोच से बनता हैं।अगर सभी अच्छी सोच रखे तो समाज में औरतों के खिलाफ कोई भी जुर्म नही होगा।

लड़कियों को शिक्षा लिये लड़कों की तरह ही समान अवसर दिये जाने चाहिए और उन्हें किसी भी विकास के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। देश भर में महिलाये, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के स्तर के महत्व और प्रगति के लिए उचित जागरूकता कार्यक्रम आवश्यक है। एक जानकार लड़की अपनी शिक्षा से पूरे परिवार और पूरे देश को शिक्षित कर सकती है।

चूंकि मैं बेटी हूँ बेकार नही विषय पर बोल रही हूँ लेकिन एक महत्वपूर्ण विषय जिसके बारे में चर्चा नही करूँ तो अधूरा होगा वो हैं।कन्या भ्रूण हत्या...

कन्या भ्रूण हत्या एक ऐसी गंभीर सामाजिक समस्या है जो हमारे समाज के तथाकथित “पारंपरिक विचारों” से उत्पन्न होती है। जिसका मुख्य कारण बेटों की प्राथमिकता होती है। लड़कियों को बोझ, गरीबी, निरक्षरता और महिलाओं के खिलाफ सामाजिक भेदभाव का कारण माना जाता है।

विडंबना यह है कि एक ऐसे देशो में कन्या भ्रूण हत्या अधिक हो रही है जहाँ लोग देवी के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं और जहाँ स्त्रियों को माँ लक्ष्मी के अवतार के रूप में माना जाता है।

इन्ही शब्दो के साथ मैं जो कुछ समझ पाई जो कुछ समाज मे होते हुए देखती हूँ उसके अनुरूप ही मैंने अपनी बातों को रखी।आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद।