07 May, 2022

BNMU में नही हैं कानून का राज...क्योंकि चरम पर हैं भ्रस्टाचार का राज।

भ्रष्टाचार के राज में कानून का राज नही हो सकता हैं, विश्वविद्यालय में।
मुरारी कुमार मयंक (सहरसा),08.05.2022 
कल अपने मंडल विश्वविद्यालय में सिंडिकेट का बैठक था...अब अधिकतर विद्यार्थी जो इंटर कर चुका है और पार्ट 1 नामांकन के लिए एक महीने से ज्यादा समय से प्रतीक्षारत हैं या जिसने नामांकन ले लिया हैं और सालो गुजर जाने के बाद उसका परीक्षा नही हुआ हैं बच्चें को सीनेट सिंडिकेट समझ मे नही आएगा और उतना जरूरत भी नही हैं इसको समझने का,इसको सिर्फ एक बैठक समझ लिया जाना ही काफी हैं।कुछ सदस्य बैठक छोड़ के जा रहें हो या कुलसचिव से डिबेट हुआ हो,जैसा कि अखबार सबका हेडिंग वहीं हैं विद्यार्थियों को लगा होगा कि निश्चित ही छात्रों के लिए ही कोई बात किया गया होगा क्योंकि मंडल विश्वविद्यालय का 1992 में स्थापना इसी उद्देश्य से किया गया था कि कोसी सीमांचल के गरीब,दलित,बंचित के बच्चों को आसानी से उच्च शिक्षा गुणवत्ता के साथ मिलेगा और दलित बंचित गरीब के बच्चें इस तथाकथित तमगा को त्याग कर सामान्य जीवन मे खुद को स्थापित करेगा।जब विश्वविद्यालय का बैठक होगा तो विद्वान लोंगो का कुछ समय का बैठक लाखों लोगों के लिए फायदेमंद होता हैं ऐसा उम्मीद हर कोई करता हैं। विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए किसी को कोई चिंता न तो कभी था न अभी तक हैं।

सिंडिकेट सदस्य इसलिए बैठक से निकल गए क्योंकि उनके लिए बातें नही किया गया होगा सिंडिकेट सदस्य इसलिए निकल गए क्योंकि यहाँ कोई कानून का पालन नही किया जाता हैं।जब निर्णय लेने वाले और कानून बनाने वाले को अपनी पड़ी हो तो वहाँ क्या हो सकता हैं।उनको इस बात का दुःख था कि निजी कॉलेज को अनुदान नहीं मिलता हैं, परीक्षा के कॉपी जांच वाला पारश्रमिक नहीं मिलता हैं ये जायज भी हैं लेकिन यूनिवर्सिटी क्या सिर्फ इसलिए बना है, क्या सिर्फ इनके लिए बना हैं क्या विश्वविद्यालय में सबसे ज्यादा अनसुना इन निजी महाविद्यालय को किया जाता हैं तो आप सोचेंगे और कहेंगे बिल्कुल नहीं।

क्योंकि एक विश्वविद्यालय छात्रों के लिए बना है और छात्रों के लिए हैं।लेकिन छात्रों का बात कोई नही कर पाए।विश्वविद्यालय छात्रों के जीवन उत्थान के लिए बनता हैं लेकिन अपने विश्वविद्यालय में जिसके लिए यूनिवर्सिटी का स्थापना होता हैं उसका ही शोषण नामांकन के समय से ही शुरू हो जाता हैं ये इनलोगों को क्यों नही दिखता हैं।आज बच्चें का विश्वविद्यालय से मोह भंग होते जा रहा हैं इसका जिम्मेदार कब अपना जिम्मेदारी समझेंगे।

छात्रों के साथ कब तक अन्याय होते रहेगा।आज जिस प्राध्यापक का नौकरी बिना पढ़ाये अपना बेतन लेने के बाद भी नही जाता हैं।उनका नौकरी छात्रों को मार्क्स देने के नाम पर जाने लगता हैं।जब विल्कुल भी यूनिवर्सिटी में कानून नही है तो सिंडिकेट महोदय इस्तीफा क्यों नही देते हैं।लेकिन इस्तीफा नही देंगे,दे देंगे तो फिर अपना जो TA, DA पता नही क्या क्या मिलता हैं वो कैसे मिलेगा। जिस निजी महाविद्यालय के हित के लिए लड़ते हुए दिखते हैं उसका चौकड़ी कैसे लगेगा।लेकिन कभी निजी महाविद्यालय से ये क्यों नही कहते है कि आप का नामांकन से लेकर परीक्षा पत्र तक का फ़ी एक सामान क्यों नहीं हैं।आपके महाविद्यालय में गुणवत्ता के नाम पर भी कुछ क्यों नही हैं।लेकिन नही पूछेंगे न।

कानून का राज कैसे होगा सर जब तक विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार का राज कायम हैं।जिसका जिम्मेदार हम सभी हैं औऱ पीस गरीब छात्र रहा हैं।सर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों से ज्यादा बड़ा समस्या कभी भी किसी संस्थान का नही हो सकता हैं।आज छात्रों के साथ अन्याय पर अन्याय हो रहा हैं और उसके लिए बोलने सोचने का एक मिनट का भी समय नहीं हैं।सर उस छात्र का क्या होगा,जिसका नामांकन के लिए,एग्जाम देते आने में सालों लगता हैं।सर उस छात्र का क्या होगा जिसका रिजल्ट आज भी 90 के दशक वाले पद्धति से दिया जाता हैं।सर 8 अरब में हिस्सा सिर्फ छात्रों का नही होता है बाद बाँकी सब क्या करते हैं हर कोई जानता हैं।

आज छात्रों को खुशी होता कि सिंडिकेट सदस्य मेरे लिए बैठक का बहिष्कार किये लेकिन आपलोगों को भी छात्रों से कोई मतलब नही है ये तो पता है लेकिन जिसके कारण सिंडिकेट है उसको भूल जाना ये भी उचित नहीं हैं।

हिसाब सबका होगा और कटेगा भी सबका।

छात्र उठा है अब ललकार नही सहेगा भ्रष्टाचार।