29 April, 2016

छात्रसंघ चुनाव में लिंगदोह कमिटी के नियमों की कोई जगह नहीं !

मुरारी कुमार मयंक-:
जी.एम.लिंगदोह की अध्यक्षता में सरकार ने छात्रसंघ चुनावों को धनबल औऱ बाहुबल के चंगुल से मुक्त कराने के लिए कमिटी गठित की थी, जिसे लिंगदोह कमिटी का मान दिया गया। पूरे देश में 2005 से इसे लागू कर दिया गया था।

लिंगदोह कमिटी को गठित करने का उद्देश्य छात्रसंघ चुनावों को बाहुबल और धनबल के चंगुल से मुक्त कराना था लेकिन आप सबको यह जानकर  आश्चर्य होगा की आज भी हर ज्यादातर कॉलेजों  में  चुनाव हाथ से बने पोस्टरों और पर्चों से लड़ा जाता है और अगर हम चुनावी इतिहास में मारपीट की घटनाएं की बात करें ,तो वो भी संख्या में काफी ज्यादा है।

लिंगदोह कमिटी के अनुसार-

कोई भी उम्मीदवार अपनी पार्टी के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से मुद्रित पोस्टर, पर्चों या किसी अन्य मुद्रित सामग्री( प्रिंटेड) का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
उम्मीदवार  प्रचार-प्रसार के उद्देश्य  से सिर्फ हाथ से बने पोस्टरों का ही उपयोग कर सकते हैं ।
प्रचार के प्रयोजन के लिए लाउडस्पीकरों, वाहन और जानवरों का उपयोग नहीं कर सकते।
चुनाव के दौरान प्रचार-प्रसार के लिए सिर्फ 5000 रुपये का ही बजट होगा।

लेकिन  वास्तविकता में कुछ अलग ही होता है। लिंगदोह कमिटी की इन सिफारिशों को छात्रों ने किस तरह से अपनाया है, हम आपको बताते हैं-

लिंगदोह कमिटी में चुनाव के दौरान प्रचार-प्रसार के लिए प्रिंटेड सामग्री( पोस्टर और पर्चें) का इस्तेमाल करने से मना किया गया है, लेकिन वास्तविकता में चुनाव के दौरान अनगिनत प्रिंटेड पोस्टर और पर्चों का इस्तेमाल किया जाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनाव के दौरान कॉलेज की दीवारें इन्ही प्रिंटेड पोस्टरो से सजी होती हैं और ज्यादातर सभी जगह अनगिनत संख्या में पर्चे ऐसे बांटे जाते हैं, कि  पर्चे हवा में उड़ते दिखाई देते हैं।
- अपनी पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रिंटेड पोस्टरों में  पार्टी का नाम और उम्मीदवार का नाम लिख दिया जाता है। लेकिन पोस्टर में कुछ ऐसी गलतियां कर दी जाती हैं, जिससे यूं लगे कि पोस्टर  उनकी  पार्टी के किसी सदस्य ने नहीं बनवाया है। और फिर वो हर तरह के कारवाही से बच जाते हैं।

- उम्मीदवारों द्वारा पोस्टरों में नाम थोड़ा लहरा कर लिखवाया जाता है, जिससे  ऐसा लगता है कि  ये  हाथ से लिखा गया हो। लेकिन अगर आप थोड़ा ध्यान से देखेंगे, तब आपको पता चल जाएगा कि  ये  सरासर धोखा है।

लिंगदोह कमिटी के मुताबिक प्रचार-प्रसार के लिए सिर्फ हाथ से बने पोस्टरों का ही इस्तेमाल हो सकता है,लेकिन शायद ही कहीं आपको हाथ से बने पोस्टर दिखाई दें।
छात्रसंघ चुनाव के लिए लिंगदोह कमिटी ने 5000 रुपये का बजट तय किया है, लेकिन उम्मीदवार 5- 10 लाख रुपये चुनाव प्रचार में लगा देते हैं। हैरानी की बात ये है कि उम्मीदवार एक दिन में ही 5000रुपये से ज्यादा खर्च कर देते हैं।  अपनी पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए छात्रों को फ्री मूवी टिकट और पार्टी देने में ही ही ज्यादा खर्च किया जाता है। 
प्रचार -प्रसार के लिए सिर्फ दो वाहनों का ही इस्तेमाल करने की अनुमति है, लेकिन वास्तविकता में एक पार्टी के उम्मीदवार ही 10-20 वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।

इस प्रकार छात्रों द्वारा  लिंगदोह कमिटी के सभी नियमों का इस तरह से क्रियाकर्म कर दिया जाता है। 

अपनी पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए कई लाख रुपये उम्मीदवारों द्वारा खर्च कर दिये जाते हैं। यही रुपये अगर खुद की या समाज की भलाई के लिए लगाया जाते, तो ज्यादा अच्छा रहते हैं।

चाणक्य परिषद् लिंगदोह कमिटी के सभी नियमों का पालन करता है और आप सब से यही कहना चाहता है कि अगर आप चुनाव जीतना चाहते हैं तो अच्छा काम करके दिखायें, अपना दृष्टिकोण सहीं रखें, छात्र हित के लिए ज्यादा से ज्यादा काम करें और ऐसा करने से छात्र खुद ही आपको अपना कीमती वोट देंगे। जो रुपये आप चुनाव प्रचार में खर्च करना चाहते थे, उन्हें अगर आप अपने खुद के विकास में लगाते हैं, तब भी अच्छा है या इनसे आप किसी जरुरत मंद की भी मदद कर सकते हैं।