मुरारी कुमार मयंक
निजी स्कूलों की मनमानी समाप्त नही होने वाला, सब अपनी राजनितिक फायदे के लिए मांग पत्र सोप दिए हो गया। पूर्व में भी डीएम महोदय को ये जानकारी दिया गया लेकिन हुआ कुछ नही।
छात्रो का रे एडमिशन हो ही रहा है, बुक भी निजी पब्लिकेशन का ही मिल रहा है वो भी एक ही दुकान में, ₹20 में 5 पेज वाले कॉपी खरीदने को मजबूर कररहे है स्कूल वाले।
अभाविप मंगलवार को ओन मांगपत्र सोपने के साथ साथ एक उग्र आंदोलन करने जा रही है, अगर आपको लगता ही की माँग पत्र में कुछ सुधार होना चाहिए तो हमें बताएं।
सेवा में
जिला पदाधिकारी, सहरसा
विषय-निजी विद्यालयो के मनमानी के सम्बन्ध में,
महाशय
निवेदन पूर्वक कहना है की जिले में स्थापित निजी विधालय जिसमे जिला मुख्यालय सहित दस प्रखंडो में संचालित स्कूलो की आर्थिक मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है,इनमे कई ऐसे विद्यालय भी शामिल है जो बिना मापदंडो को पूरा किये ही संचालित हो रहे है परंतु उन मापदंडो के नाम पर मनमाने तरीके से छात्रो के अभिभावको से पैसो की वसूली की जा रही है अच्छी शिक्षा हेतु अभिभावक अच्छे स्कूलो में पढ़ाने की चाह में बच्चों का नामांकन इन स्कूलो में कराते है ,लेकिन जिला मुख्यालय के लगभग एक दर्जन से ज्यादा स्कूलो में पुनः नामांकन(re admission) के नाम 2000 से 8000 तक मोटी रकम वसूल कर उनका आर्थिक शोषण किया जाता है,इसके अलावा प्रति वर्ष सभी कक्षाओ की किताबो को बदल दी जाती है ताकि किताबो को अदल-बदल कर बच्चे न पढ़ सके ,प्राइवेट पब्लिशिंग हाउस की किताबो को स्कूलो में चलाने के लिए संचालको को मोटी रकम मिलती है ,बच्चों को कॉपी भी किसी खास ब्रांड का,या स्कूल के नाम छपे कवर की कॉपी लेने को मजबूर किया जाता है।जो महंगे होते है स्कूल ड्रेस,बस भाड़ा,महीना शुल्क,स्कूल विकाश आदि के नाम पर भी काफी पैसे लिये
जाते है,जिसका सीधा लाभ स्कूल मालिको को तो होता है परंतु अभिभावको पर इसका भार पड़ता है इन सभी भुगतानो के बाद भि स्कूल में गुणवत्ता की घोर कमी है,निजी स्कूल में एक घोटाला तेजी से फैल रहा है।यहाँ CBSC मापदंडो के अनुरूप शिक्षक रखने है।लेकिन 2500 से 3000 रु में गैर अनुभवी शिक्षक रखे जाते है।जिनकी जाच की जा सकती है।स्कूल वाहन भी लगभग जर्जर अवस्था में या क्षमता से अधिक बच्चों को लाने ले जाने में उपयोग किये जाते है परिवहन विभाग ल
के स्तर से इनकी जाँच नहीं होती क्योकि मोटी रकम या निजी नाम इन स्कूलो के द्वारा मुहैया कराई जाती है,जिसका आये दिन दुर्घटना की आसंका बनी रहती है,उक्त सभी मामलो की जांच अधिकारियो की एक स्वतंत्र टीम से कराइ जाये।इसके लिए जिला स्तर पर एक स्थाई समिति का गठन किया जाये जिसमे जिला प्रशासन के अधिकारियो के अलावा समाज के प्रबुद्ध लोगो को जगह दी जाए जिससे इसकी सतत निगरानी हो सके।
अतः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् इन विषयो पर उचित करवाई की मांग करता है।नहीं तो आंदोलन को मजबूर होना पड़ेगा।
1.प्रतिलिपि-जिला शिक्षा पदाधिकारी, सहरसा
निवेदक
मुरारी कु मयंक
जिला संयोजक
ABVP SAHARSA