18 July, 2020

अभाविप के द्वारा आयोजित छात्रनेता सम्मेलन में कोविड के समय मंडल यूनिवर्सिटी और अभाविप विषय पर मेरा विचार

शैक्षणिक आर्थिक राजनैतिक हालत से पिछरे होने क बाद भी हमारा यह भूमि काफी उर्बरा रहा है - मयंक 


COVID-19 के समय मे मंडल विश्वविद्यालय और अभाविप।

हमलोग सदियों से सुनते आ रहे है कि हमारा कोसी क्षेत्र राजनैतिक और आर्थिक दृष्टिकोण के साथ साथ शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी काफी पिछड़ा हुआ है। लेकिन मेरा माना है यह धरती बंजर नही काफी उर्बरा रहा है।1992 में स्थापित मंडल यूनिवर्सिटी न सिर्फ कोसी के छात्रों के लिए बल्कि सीमांचल के छात्रों के लिए भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में हमारे पूर्वजों ने स्थापित किया था लेकिन समय के साथ यह यूनिवर्सिटी प्रगति करने से ज्यादा अपना स्थिति भयावह और चिंतनीय करता गया। मंडल विश्वविद्यालय पूर्णिया विश्वविद्यालय से पृथक होने तक सैकड़ों डिग्री महाविद्यालय के साथ-साथ इंजीनियरिंग मेडिकल जैसे बड़े-बड़े महाविद्यालय का केंद्र रहा है। वर्तमान समय में विश्वविद्यालय के कार्य सहरसा सुपौल मधेपुरा में सिमट गया जिससे हम छात्रों को लगा कि हम आसानी से डिग्री विषय के अलावा मेडिकल इंजीनियरिंग जैसे विषयों का ज्ञान आसानी से प्राप्त करेंगे लेकिन अभी भी यह विश्वविद्यालय तथा इनके अंतर्गत आने वाले महाविद्यालय में ना तो समुचित पढ़ाई मिल पा रहा है न ही शैक्षणिक माहौल। अब सिर्फ नामांकन और परीक्षा का कार्य अध्यापकों के नग्न संख्या के साथ हो रहा है। जो वर्तमान महामारी के समय पूर्णत ठप पड़ा हुआ है विश्वविद्यालय की स्थापना काल से ही अभाविप ने विश्वविद्यालय के दयनीय शैक्षणिक हालात को देखकर अपने रचनात्मक और सकारात्मक आंदोलन के माध्यम से गिरते शैक्षणिक स्थिति को उठाने का प्रयास करते आ रही है। वर्तमान समय में जब कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरा विश्व त्राहिमाम है न कोई अछूता नहीं रहा है। विकट स्थिति में हमेशा से चाहे बाढ़ की समस्या हो या सुखाड़ की समस्या  या यूं कहें कि कोई भी आपदा हुआ हो अभाविप हमेशा से एक मददगार के रूप में छात्र तथा नागरिकों के साथ खड़ा रहा है। तो इस समय जब पूरे देश के लोग अपने अपने घरों में रहने को मजबूर है तो अभाविप मंडल विश्वविद्यालय के कार्यकर्ताओं ने घर से निकलकर हर जरूरतमंदों के पास पहुंचकर हर संभव मदद कर रहा है। चाहे मुरलीगंज के कार्यकर्ताओं के लॉक डाउन में जरूरतमंदों को भोजन पहुंचाने का कार्य हो या सहरसा रहुआ के कार्यकर्ताओं के द्वारा संचालित रहुआ गांव में परिषद का पाठशाला कार्यक्रम हो काफी प्रेरणा और मददगार साबित हो रहा है।
अभाविप के द्वारा आयोजित छात्रनेता सम्मेलन में मेरे द्वारा प्रस्तुत विषय प्रवेश से उद्घृत।