वेहाल सहरसा के लिए जिम्मेवार सहरसा ही है.....
क्या है न कि राजनीति अब अनैतिक तरीके से जमा किये गए पैसों को बचाने के लिए ही हो रहा है न कि सहरसा को बचाने के लिए।ऐसे लोगों को इडेंटिफाय करने की जरूरत है। सहरसा का ऐसा हाल के लिए जिम्मेवार तो सब है कि लेकिन जिम्मेदार कोई नही।सहरसा पूरे बिहार में एक ऐसा जिला हो गाया है जहां न तो सड़क है न ही शिक्षा न ही स्वास्थ्य ...आज सहरसा को हाल ही में बनें सुपौल से सिख मिलरहा है।
पता नही हमारे इस धरती को हो क्या गया है जो नेतृत्व पैदा करता था जिसका ख्याति पूरे देश मे हुआ करता था उसका ऐसा हाल...
देखिये अगर एक सांसद विधायक इसका विकास कर सकता था तो हो गया होता...लेकिन दुर्भाग्य की हमें अपने जन्मभूमि के लिए किसी से लड़ने और खुद को कुर्बान करने की हिम्मत ही नही है...हमें तो हिम्मत है जीर्ण शीर्ण पड़े सहरसा को और कितना बर्वाद कर सके...कितना लूट सके।
राजनीति करने वाले कभी भी समाज सुधारक नही हो सकता है और समाज को वही सुधार सकता है जिसको समाज से कोई अपेक्षा नही हो लेकिन हमारे सहरसा में थोड़ा सा व्हाइट कपड़ा क्या पहन लिए खुद को विधायक सांसद ही समझ लेते है।थोड़ा धरना प्रदर्शन क्या कर लिए अपने आप को कैंडिडेट ही समझ लेते है।जिससे न तो आपको कुछ मिलता है न ही सहरसा को....
ये तो हर जगह होता है लेकिन हमारे सहरसा में खासकर ज्यादा होता है हमको जो जिम्मेवारी दिया गया है या अपने मन से ले लिए है वो नही करके हर काम करेंगे...
हम अपने बगल के वार्ड पार्षद,मुखिया से काम करवा नही सकते लेकिन मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को जिम्मेदार बता देंगे।
नजर उठा के देखिये जो लड़का खुद के लिए कुछ नही कर सकता वो समाज को दिशा देना चाहता...जिसको शुरू से ही पिताजी के पैसों पर अय्यासी करने का आदत हो जाता है वही बाद में समाज के पैसों पर अय्यासी शुरू कर देता है।
आज हम जाती पाती करते रहते है लेकिन ये नही सोचते कि हमारे समाज मे दो ही जाती है दो ही भाई है अमीरों और गरीबों...गरीब को तो सहरसा का हाल दिखता है यहां का गर्त में जा चुके स्वास्थ्य दिखता है शिक्षा दिखता है लेकिन अमीरों को...उसको सिर्फ अपना बिज़नेस।
दुर्भाग्य है हमारा की आज हम उस पर भड़ोसा कर रहें है उसको भैया भैया कर रहें है उसके पीछे पीछे कर रहें है जिसको न तो आपकी न ही समाज की जरूरत है उसको तो जरूरत है अपनी बिजनेस कैसे बढ़ते रहें।
दुःख की बात ये है कि जिसको सहरसा के लिए सोचना चाहिए वे लोग सिर्फ अपने स्वार्थ पूर्ति कररहे है। एक जिम्मेदार युवा को पहले अपने परिवार फिर समाज के लिए सोचना चाहिए।क्योंकि अगर आप अपने परिवार में खुशहाली नही ला सकते तो समाज मे कैसे लाएंगे...
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