धर्म,शिक्षा और साहित्य के लिए विश्वविख्यात अपना देश पश्चिमी प्रेम के खतरनाक प्रतीक वेलेंटाइन डे देश के संस्कृति,संस्कार,सभ्यता के लिए अभिशाप है लेकिन हम युवा आज वेलेंटाइन वेलेंटाइन खेल रहें है।हम युवा पीढ़ी अपने जिम्मेदारी और कर्तव्यों से विमुख होकर कभी रोज डे, कभी चॉकलेट डे कभी टिकटोक डे मना रहें है।लेकिन हमें देश के स्वर्णिम इतिहास को न तो जानने की जरूरत है न समझने की न पढ़ने की।ये सिर्फ दुर्भाग्य हैं।ये वेलेंटाइन प्रेम का नही चरित्रहीनता का प्रतीक हैं जो आने वाले समय मे हमारे देश समाज घर परिवार के लिए खतरा बन जायेगा तब हम सोच के ऐसी चीज से दूर नही रह पाएंगे।
जब हम अपने पूर्व के इतिहास को पढ़ने का कोसिस करते है तो समझ आता है अपना देश।
ये हम युवा युवतियों की गलती है कि हम जिस देश मे रहते है वो संसार को चलना सिखाया है और सिखाता रहेगा।
ये वहीं आर्यावर्त है, जहां कभी श्रवण एवं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जैसे आज्ञाकारी पुत्र अपना पूरा जीवन मां-बाप की सेवा एवं वचनों का पालन करने में व्यतीत कर देते थे। ये वहीं हिंदुस्तान है जहां कभी राणा कुम्भा,राणा सांगा, बप्पा रावल, दाहिरसेन, पृथ्वीराज चौहान, दुर्गादास राठौड़, छत्रपति शिवाजी और महाराणा प्रताप जैसे शूरवीर योद्धाओं ने जन्म लिया। ये वहीं भारत है जहां महारानी लक्ष्मीबाई, अवंतीबाई, महारानी पद्मिनी और सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी नारी शक्तियों ने जन्म लिया और अपने मान-सम्मान और स्वाभिमान के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। ये वहीं हिंदुस्तान है जहां हजारों वर्षों की गुलामी सहने के बाद हमारा देश इन्हीं महान शूरवीरों और सैकड़ों महान क्रांतिकारियों जैसे भगतसिंह,रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, सुभाषचन्द्र बोस आदि के देशप्रेम और देशभक्ति के बदौलत आजाद है। यदि पहले की युवा पीढ़ी भी वर्तमान युवा पीढ़ी की तरह ऐसे ढोंग में पड़ी होती तो शायद हमारा देश आज भी गुलाम होता।
वेलेंटाइन डे अंग्रेजों द्वारा पश्चिमी देशों से आया हुआ एक ऐसा अराजक नशा है जो देश, समाज और लोगों के चारित्रिक एवं मानसिक विकास को नष्ट करना एवं भारतीय संस्कृति को आघात पहुंचाना चाहता है।
आज के युवाओं को अपने मन को केन्द्रित करने, अपने कर्तव्यों, जिम्मेदारियों को समझने और देश की उन्नति के लिए विज्ञान,शिक्षा एवं तकनीकी के क्षेत्र में नये अनुसंधानों की खोज करने की सख्त जरूरत है। देश के भविष्य कहे जाने वाले युवाओं को वेलेंटाइन के चक्कर में ना पड़कर अपना समय देशहित के कार्यों में, माता-पिता की सेवा में, गरीब दुखियों की सेवा में, धर्म, शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में, मानवता, इंसानियत और सार्वभौमिकता की भावना में और देश के ऐतिहासिक धरोहरों एवं संस्कृति की रक्षा करने में व्यतीत करने चाहिए।
ये मेरा व्यक्तिगत विचार हैं।
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