30 December, 2018

जन्मस्थान बडगांव में सम्मानित हुई मैथिलि विदुषी शेफालिका वर्मा

 बडगांव 30 दिसम्बर 2018
हम अपने गाँव के एकात्म भाव को नही भुल सकती हूँ |- डॉ शेफालिका वर्मा बडगांव सहरसा मिथिला भारत |

आज अपने गाँव में मैथिलि साहित्य के प्रकांड विद्वान, सहरसा के सर्व नारायण सिंह  राम कुमार सिंह  महविद्यालय के प्राध्यापक और बडगांव के बेटी डॉ शेफालिका वर्मा का सहरसा में तीन दिवसीय मिथिला कला साहित्य और फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने सहरसा आई है | 
इसी दौरान शेफालिका दीदी के  साथ में पुत्र डॉ राजीव वर्मा भी थे अपने (मायका )जन्मस्थान बडगांव आना हुआ |दीदी बहुत  दिनों बाद बडगांव आई हुई थी |बडगांव के बेटी के बडगांव आने की  खबर सुनते ही सभी ग्रामवासी अपने बेटी के स्वागत में  घर से निकल कर  सड़क पर खड़े थे | बहुत  दिनों बाद जब बेटी घर आती है घर में कितने खुसी होती हमलोग वाकिफ है और बेटी को कितना ख़ुशी होती है ये दिख रहा था गाँव में जब सम्पूर्ण गावं दीदी को सम्मानित करने के लिए खड़े थे| नेतृत्व कररहे थे कविश्वर विचार सह सेवा संसथान के अध्यक्ष सह मास्टर माएंड पब्लिक स्कूल के निदेशक चद्रशेखर झा, उपाध्यक्ष सह भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष मुकेश मानस, गाँव के सबसे सजग युवा और बीजेपी के पंचायत अध्यक्ष भीम शंकर झा और बडगांव के रहने वाले सहरसा के प्रशिद्ध अधिवक्ता अविनास वर्मा  |

सम्पूर्ण ग्रामीण दीदी को पाग और शौल देकर सम्मानित करके गर्व के साथ आह्लादित थे दीदी ने अपने वक्तव्य में भी सभी को बता दी की बेटी बेटी होती है और शेफालिका दी जैसे बेटी हो तो फिर बात ही कुछ और होता है |

आज अपने भाई बहन ग्रामीण से बात करते हुए दीदी ने कही कि हम बडगांव के हवा,जल,जमींन परिजन संग बडगांव जैसे भूमि को प्रणाम करती हूँ| बडगांव भुत महान भूमि है| जीवन के इस समय में मै कभी सोची भी नही थी की फिर बडगांव जा पाऊँगी |मन करता है हमेसा बडगांव में रहू |मन हमेसा बडगांव में ही रहता है |माँ भगवती के पूजा पाठ हम भी किये है और आज भी हमलोग माँ के  दरबार में रहे |

अपने पापा स्वर्गीय श्री ब्रजेश्वर मल्लिक के बारे में चर्चा करते हुए कही 
पापा को गाँव में सभी लोग डीपटी साहब कहा करते थे |पापा हमेसा सिखाते रहते थे बडगांव ऐसा गाँव है जहाँ सिर्फ और सिर्फ विद्वान लोग रहते है ये विद्वानों की धरती है |आगे बताती है की यहाँ कोई ब्राह्मण नही कोई कायस्थ नही यहाँ सब एक परिवार के जैसे रहते है |हर कोई सुख दुःख में एक साथ रहते है | पूरा गाँव एक परिवार के जैसा था |

दीदी अपने शादी के समय को याद करते हुए कहती है मेरी शादी 59 यानि 1959 में हुई थी उस समय में 150 बरयति  डुमरा (ससुराल ) से आये हुए थे |

रघु झा(उस समय के प्रख्यात गबैया ) के याद करते हुए उन्हें भी महान बताते हुए अपने परिवार के ही बताई तथा उनके गीत का भी चर्चा किये साथ ही प्राणरखन झा पुर्हित (गाँव से उस समय के प्रकांड विद्वान थे वैदिक और कर्मकांड के) चर्चा करते हुए उनको स्मरण की |
आगे बताती है की पूरा गाम मिलकर मरजाद के दिन बरयाति को  पूरा गाँव मिलकर सम्मान किये और एक से बढ़ के एक प्रश्न उत्तर सब दोनों तरफ से हुआ |हम अपने गाँव के एकात्म भाव को नही भुल सकती हूँ |

मौके पर पूर्व शिक्षक अशोक झा ,पंडित रामचंद्र झा,खैलानंद  झा,बैद्यनाथ झा,नंदकिशोर झा,  विजय झा, रमेश चन्द्र झा, पुनि श्याम ठाकुर, सहित सैकड़ो ग्रामीण मजूद थे |
दीदी के आने की खबर सोशल मीडिया सहित गाव के व्हाटशप ग्रुप में भी खाफी वायरल रहा |ग्रामीण लोगो के अलावे सोशल मीडिया के द्वारा दूर रहने वाले लोगो में भी दीदी को गाँव आने की सलाह देते हुए नजर आये |

पटना में रहने वाले सत्य प्रकश झा रिसर्च स्कॉलर जो पटना विश्वविद्यालय के छात्र है मैथिलि में लिखते हुए कहते है की बहुत ख़ुशी का बात है शेफालिका दीदी अपना नैहर बडगांव आई है |हम इनका स्वागत नही कर पाए इसका बहुत  कचोट है |हम अपने गाँव के कविवर चंदा झा विचार मंच के साथ साथ शेखर भाय जी को भी बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ |
वही मुकेश मानस जी लिखते है की मेरे लिए ये सोभाग्य का छन रहा जब मैथिलि विदुषी साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पद्म श्री  सम्मान के लिए नामित विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त बडगांव के धरती पर जन्म लेने वाली डॉ शेफालिका वर्मा से रूबरू होने का मौका मिला |  
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टाइपिंग मिस्टेक के लिए छमा प्रार्थी 
मुरारी कुमार मयंक