बड़गाँव के स्वर्णिम इतिहास डॉ ब्रजेश्वर मल्लिक के जीवनी को हम सबके सामने राखरहि है श्रीमती शेफालिका वर्मा। आप श्री मल्लीक की सुपुत्री और साहित्य क्षेत्र के जाने माने हस्ती हैं। आपकी लेखिनी आपकी पहचान है।
(05 nov 2016। मुरारी कुमार मयंक)☺
MR. BRAJESHWAR MALLIK
BADGAON, SAHARSA .......
आज आपकी जन्मदिवस है।आपको भावभीनी श्रधांजलि..आप बड़गाँव के शान थे..आपको बड़गाँव सदा याद रखेगी।
An epitome of perseverance , determination, wisdom of truthfulness, who dedicated his whole life for imparting quality education to his children .The love of a family is life's greatest blessing. An affectionate Mallik family full of ups n downs but always lived for society .
PAPA NOW WE WANT ONLY UR BLESSINGS N STRENGTH 2 FIGHT WITH D STRUGGLES OF LIFE ..
MANY MANY HAPPY RETURNS OF D DAY OUR LOVING PAPA
we...Shefalika -Lalan , Deepmalika-Amar, Madhulika-Shankar, Krishn .Chanda, Mrinalika-Vijay , Sharad-Annu, Chaynika-Hriday, Sarika-Pankaj, Niharika-Baidyanath, Asim-Samita with their whole family
हमारे पापा
सन 1941 की बात है जब पापा ने एम ए पास किया था तो चरित्र प्रमाण पत्र लेने पटना कॉलेज के प्रिंसिपल श्री सुविमल चन्द्र सरकार के पास गए। प्रिंसिपल ने पापा की पीठ ठोकते हुए कहा था कि मुझे तुम पर गर्व है। इतिहास में सर्वोत्तम शोध लेख के लिए तुम्हे सरोजिनी स्वर्ण पदक मिला ,पटना कॉलेज के तुम इतिहास-समिति के आजीवन सदस्य रहे। हिंदी के श्रेष्ठ विद्यार्थी के लिए तुम्हे चाँद पदक मिला , मैथिली में चंदा झा पर सर्वश्रेष्ठ शोध लेखन के लिए विशेष स्वर्ण पदक मिला। पटना कॉलेज की रजत जयंती के लिए तुम्हे ही प्रदर्शनी के प्रभार में रखा गया ,जिसके लिए तुम्हे विशेष प्रशंसा-पत्र मिला पटना कॉलेज के सोशल सर्विस लीग के तुम महामंत्री रहे। बिहार में सर्वश्रेष्ठ वयस्क शिक्षा प्रदान करने के लिए तुम्हे बिहार सरकार का पदक मिला। अखिल भारतीय वयस्क शिक्षा-पर्षद की कार्यकारिणी सदस्य के रूप में तुम्हे ही चुना ग्य। पटना विश्वविद्यालय को तुम पर गर्व है। .
हिंदी की सेवा के लिए बिहार सरकार द्वारा राजकीय सम्मान से सम्मानित -----
१९४२ से १९५७ तक बिहार सिविल सर्विस में यानि ( स्वराज से पहले स्वराज के बाद तक )
पुस्तकें---------पापा All India .Post and Telegraph class 3 Association, Bihar, ,के प्रेसीडेंट भी थे। श्री कृष्ण बल्लभ सहाय के बाद पापा अखिल भारतीय चित्रगुप्त सभा के प्रेसीडेंट बने। श्री कृष्णा नगर निवासी संघ के फाउंडर प्रेजिडेंट भी थे कालांतर में उन्होंने हमारी माँ के नाम से अन्नपूर्णा प्रिंटिंग प्रेस खोला , साथ ही
K. K. & co भी के फाउंडर प्रेजिडेंट भी थे....
पुस्तकें------
कोसी गीत ,, अमृतमय जीवन की ओर , चाँदी का गिलास , हिमालय पुकार रहा है , SPLEDOUR OF BIHAR , उनकी अंतिम किताब भ्र्ष्टाचार के दंश है जिसमे अपनी आत्मकथा के साथ नही मानव मूल्यों को बचते हुए कितने दंश उन्हें सहने पड़े आदि आदि , बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका 'चमकते सितारे' का सम्पादन,अंग्रेजी पत्रिका VIEWS & VOICE के भी चीफ एडिटर रहे और भी कितनी महत्वपूर्ण पुस्तको का अंग्रेजी में प्रकाशन। …। उनकी अंतिम किताब ' भ्र्ष्टाचार के दंश ' है जिसमे अपनी आत्मकथा के साथ ही मानव मूल्यों को बचाते हुए नौकरशाही के कितने दंश उन्हें सहने पड़े इसका विशद वर्णन है । ...उन्होंने कभी जातीयता को बढ़ावा नही दिया ,बहुतों को सरकारी नौकरी में रखवाया , क्या ब्राह्मण , क्या राजपूत , क्या कायस्थ ..... अपने गाँव बड़गांव में वे डिप्टी साहेब के नाम से जाने जाते हैं।
( डॉ शेफालिका वर्मा )