28 June, 2016

आखिर किधर जा रहा है अपना समाज

Murari Mayank - A.B.V.P:
आखिर किधर जा रहा है समाज,इतनी हत्या अपहरण बलात्कार के लिए जिम्मेदार कौन,
समाज गार्जियन या छात्र छात्राएं..
भारत देश सदा ही औरतो का सम्मान करती आई है और विश्व को भी सिखाया औरतो का सम्मान करना...लेकिन कुछ तथाकतिथ लोगो के वजह से कुछ पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से आज समाज के भारतीय महिला समुदाय असुरक्षित है नही लेकिन उसके तरफ बढ़ रही है। आज गार्जियन पैसे कमाने के पीछे इतने मसगुल है कि उनको अपने संतान को भारत के महान संस्कृति और सभ्यता की जानकारी देना उनसे बातें करने तक का समय नही निकाल पा रहे है..आज अपना समाज लड़का लड़की को सामान दर्जा देय चुकी है लेकिन कुछ ऐसे हरकत सामने आता है कि माता पिता के साथ साथ समाज को भी शर्म से झुकना पड़ता है..आज प्रकृति के द्वारा मानव सहित सभी प्राणियो को प्रेम करना सिखाया है..लेकिन उस प्रेम के आर में आज कुछ ऐसे हरकत करते है बच्चे जिसे हर कोई गलत कह सकता है..
कुछ दिन पहले शहर के किसी नामी कॉलेज में एक लड़का लड़की दिन के 11 बजे आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा जाता है वो भी कॉलेज के प्रधानचार्य के द्वारा। हर किसी को गुस्सा आ सकता है ऐसा स्तिथि पर पूर्ण ढुलाई होने के बाद जब पूंछा गया तो  लड़की बताई की हमलोग क्लास 8 से दोस्त है..अगर गोर करे तो पता चलेगा की 90% लड़का लड़की के ऐसी दोस्ती है।और ये लड़का लड़की कहि ऊपर से नही आता है आपका और मेरा भाई बहन बेटा बेटी है..तो बढ़े कहानी के तरफ लड़का को पिता नही है वो पटना में रहकर पढता है विधवा माँ किसी तरह अपने बेटे को पढ़ाते है जो समस्तीपुर का रहने वाला है..लड़की यही सहरसा के इशलमिया चौक पर अपने माँ पिता के साथ रहकर पढ़ाई करती है माँ घर में काम और पिता किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते है..दोनों के गर्जियन का मकसद पढना है बस.. लेकिन वो लड़का पटना से आकर सहरसा में दो रोज से उस लड़की के साथ घुमा..किसी को भनक तक नही लगा.. लड़का लड़की में दो में से किसी को भी शर्म नही..जब लड़की के माँ को बुलाया गया तब उसकी माँ अपने बेटी को गलत मानने को तैयार ही नही थी जब लड़की सब बातो को फिर कहि तब उसकी मुँह शर्म से लाल हो गयी..इस घटना में जो सबसे मुख्य रहा वो मोबाइल फ़ोन रहा..आज बच्चों के हाथ में मोबाइल देने के बाद उसे चेक करने का फुर्सत नही है..और बच्चे उसका दुरूपयोग करता है..
ऐसा स्थिति शहर के साथ साथ गांव का भी जहाँ पेरेंट्स को मोबाइल के बारे में जानकारी नही होने के कारण बच्चे उसका गलत फायदा उठाते है..इसी सब का उपज है आज का अपहरण बलात्कार आदि आदि... आज  सब अपने बच्चों के प्रति सतर्क नही है..और पूर्ण विश्वास करके उन्हें स्वतंत्र छोर देते है.. कलयुग में ये विश्वास बहुत दूर की बात है..अगर हम चाहते है कि लड़कियो का शोषण रुके तो सुरुवात अपने घरो से करें.. कभी अपने बेटो को अगर गलती करने पर छोर रहे है तो कभी आपकी बेटी भी हो सकती है.. अगर आपके बच्चे पथभ्रस्ट हो गए तो आपके नाम को उसी रस्ते से गुजरना पड़ेगा.. अगर बच्चों को फ़ोन दिए है तो उसका निगरानी जरूरी है चाहे वो बेटा हो या बेटी..तभी हम एक सुंदर समाज की परिकल्पना कर सकते हैं।(मयंक)