माँ माँ माँ...जब कोई कास्ट अर्थात दुःख हमलोगो पर आता है अनायास हम माँ माँ करने लगते है, आज मदर्स डे पर सभी दोस्तों को माँ के साथ फ़ोटो देखा हरेक ने माँ का माँ रूपी साक्षात् जगत जननी कि बखान अपने शब्दों में किये हरेक ने तस्वीर पोस्ट किये है लेकिन सायद ही कोई है जिन्होंने ने तस्वीर में माँ का चरण अस्पर्स किये है।चलिए खैर आज इंटरनेट का युग कहे या पश्चमी संस्कृति का जवाना सभी ने आज सभी ने माँ को याद किया।
लेकिन आज देखने का बाद लगा कि ऑनलाइन ही सही लेकिन माँ को याद तो किये।
हम सबको माँ पिता और अपने समाज के हरेक अग्रज को हमेशा सम्मान की दृस्टि से देखे क्यों कि अपना भारत देश एक देश ही नही एक संस्कृति और सभ्यता से भरे समाजो का समूह है जहाँ हमारे धर्म ग्रन्थ हमको अपनी कर्तव्य का बोध करता आया है...रामायण महाभारत वेद पुराण हमको शिक्षा देने के लिए सदैव तैयार रहते है...अगर माँ पुत्र, पिता पुत्र, गुरु पुत्र, सहित अपने सगे लोगो के साथ व्यबहार को समझना हो तो तुलसी दास कृत रामचरित्र मानस को देखे..जहाँ एक दोहा है।
प्रातःकाल उठ के रघुनाथा- मतु पिता गुरु नबहि माथा। श्री राम माँ के आशीर्वाद से ही मर्यादाप्रोसोत्तम हुए। कहने का मतलब ये है कि हम सभी को एकरोज नही सब रोज माँ और अपने सभी लोगो का मदद करें सेवा करे।आशीर्वाद से सबकुछ संभव है.....
क्या आप जानते हैं माँ भगवान से भी बढ्कर क्यूँ है? क्यूंकि भगवान तो हमारे नसीब में सुख और दुख दोनो देकर भेजते हैं, लेकिन हमारी माँ हमें सिर्फ़ और सिर्फ़ सुख ही देना चाहती है." सच दोस्तों, इस दुनिया में अगर कोई चीज़ अनमोल है तो वो है माँ की ममता, माँ का प्यार. माँ के आँचल का महत्व वही जान सकता है जिसकी माँ नहीं है. माँ का जीवन में कोई पर्याय नहीं है। तो माँ का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता
और माँ जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता है।
इसी के हम उन सभी माताओ को प्रणाम जिन्होंने ने अपने पुत्र को अपनी आशीष अनवरत देते रहते है।
पिक में एक मेरी दीदी है जिसने जन्म के बाद हमे पाल पोस के बड़ा किये एक वो है जिसने हमे जन्म दिए।
इनदोनो का जन्मों जन्म तक ऋण अदा नही कर पाउँगा।
मुरारी कुमार मयंक
जिला संयोजक
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिसद सहरसा।