iमुरारी कुमार मयंक
शुभरात्रि! Good night and Good morning
चलिये! मैं थोड़ा " मनुस्मृति और सुद्र् " विषय पर कुछ खोज बिन्ह कर लेता हूँ,
और अभी तक इतना समझा हूँ कि मनुस्मृति में वर्ण व्यवस्था को ही बताया गया है और जाति व्यवस्था को नहीं इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि मनुस्मृति के प्रथम अध्याय में कहीं भी जाति या गोत्र शब्द ही नहीं है बल्कि वहां चार वर्णों की उत्पत्ति का वर्णन है | यदि जाति या गोत्र का इतना ही महत्त्व होता तो मनु इसका उल्लेख अवश्य करते कि कौनसी जाति ब्राह्मणों से संबंधित है, कौनसी क्षत्रियों से, कौनसी वैश्यों और शूद्रों से l
धनी होना, बांधव होना, आयु में बड़े होना, श्रेष्ठ कर्म का होना और विद्वत्ता यह पाँच सम्मान के उत्तरोत्तर मानदंड हैं | इन में कहीं भी कुल, जाति, गोत्र या वंश को सम्मान का मानदंड नहीं माना गया है |
जो ब्राह्मण,क्षत्रिय या वैश्य वेदों का अध्ययन और पालन छोड़कर अन्य विषयों में ही परिश्रम करता है, वह शूद्र बन जाता है | और उसकी आने वाली पीढ़ियों को भी वेदों के ज्ञान से वंचित होना पड़ता है | अतः मनुस्मृति के अनुसार तो आज भारत में कुछ अपवादों को छोड़कर बाकी सारे लोग जो भ्रष्टाचार, जातिवाद, स्वार्थ साधना, अन्धविश्वास, विवेकहीनता, लिंग-भेद, चापलूसी, अनैतिकता इत्यादि में लिप्त हैं – वे सभी शूद्र हैं |
#मनुवाद और #ब्राह्मणवाद :
उत्तर प्रदेश में आविष्कृत शब्द मनुवाद और अंग्रेजों की किताबों में आविष्कृत शब्द ब्राह्मणवाद लोगों की रोज़ी रोटी का साधन अभी भी बना हुआ है .....
उनसे पूछिये मनुवाद है क्या ?
तो दो चार प्रभावशाली सवर्णों का नाम लेकर कहेंगे कि सदियों से हर तरफ यही लोग अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं!!
सचिन तेंदुलकर को कहेगें वे ब्राह्मण हैं इसलिए क्रिकेट में इतना आगे बढ़ पाए ........
.......लता मंगेशकर को कहेगें वे ब्राह्मण हैं इसलिए गायन में किसी और को बढ़ने नहीं दिया ....
......मुकेश जी चूंकि कायस्थ ब्राह्मण थे इसलिए राजकपूर और मनोज कुमार उनसे गाना गवाते रहे ....
.... अब हम आपको 1917 में ले चलते हैं .... ........
........मोहनदास करमचंद गांधी ,, गुजरात के वैश्य परिवार में जन्म लेकर भारत की आज़ादी के लिए अपने तरीके से कोशिश शुरू करते हैं....(जो आज की अमनुवादी परिभाषानुसार पिछड़े वर्ग के थे )
....... सारे देश के लोगों के साथ ब्राह्मण ( जिनमे भूमिहार ब्राह्मण और कायस्थ ब्राह्मण भी सम्मिलित हैं ) और क्षत्रिय भी उनके पीछे चलने लगे ......
एक ब्राह्मण रवीन्द्रनाथ ठाकुर नें उन्हें महात्मा कहा और मदनमोहन मालवीय, पंडित मोतीलाल,पंडित जवाहर लाल जैसे लोग उनके चरणों के पास बैठकर उनका आदेश लेकर उसका पालन करने लगे .....
........ यही है मनुवाद और ब्राह्मणवाद कि कोई किसी भी जाति का हो, अगर वह मनुष्य के रूप में श्रेष्ठ है तो उसका पूजन अभिनन्दन सभी वर्ण, सभी जाति, समुदाय के लोग करेंगे......
मगर हां, इसके लिए उसे उस योग्य होना होगा ....
तात्कालिक तुच्छ स्वार्थ के कारण लोगों को दिग्भ्रमित करने वालों को इतिहास में कभी सम्मान न मिला है न मिलेगा .....
भीड़ तो हिटलर, तोजो मुसोलिनी के लिए भी जुटती थी मगर इतिहास के न्यायालय में ऐसे लोगों का नाम अपराधी के रूप में ही दर्ज है ....
#अमनुवाद के बौद्धिक प्रतिरोध हेतु Share कीजिये .....