15 February, 2016

वेलेंटाइन डे

परसो वेलेंटाइन डे था और मैं इंटरनेट और फ़ोन सब कुछ से दुर माँ सरस्वती के बंदना में गाँव में था।
कुछ सच्चाई है जिसे हम सभी को अबगत होना चाहिए।। संत वेलेंटाइन ने प्रेम स्वीकारा तथा माना कि प्रेम होना चाहिए। लेकिन प्रेम पर संदेह है। अगर प्रेम पर संदेह न होता तो लड़कियां जलाई न जाती। तेजाब नहीं फेंकी जाती तब दुष्कर्म नहीं होता था। सच तो यह है कि प्रेम शालीनता है अश्लीलता नहीं है। प्रेम को किसी से शिकवा मनाही है, फुहड़पन से शिकवा तथा शिकायत है। आज वेलेंटाइन डे को वेलेन्टाइन वीक बना दिया है। यह फूहड़पन का पैकेज तय करता है कि बाजार ने पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। फूहड़पन का अंत ब्रेकअप डे से होता है। प्रेम एक दिवसीय क्रिकेट मैच नहीं है। प्रेम अहर्निश साधना का नाम है। प्रेम में सिर्फ समर्पण होता है। 14 फरवरी को ही शहीद भगत सिंह के फांसी का एलान दिवस है। लेकिन यह कितने युवा को पता है। बाजार में शहीद भगत सिंह की स्मृति में बेचने के लिए कोई सामग्री नहीं दिखती है लेकिन वेलेंटाइन डे के लिए हर दुकान सजी है। उन्होंने कहा कि सच तो यह है कि प्रेम पहले खुद से करें। मानवता को प्यार करें। मातृभूमि के लिए प्यार करें तो वेलेंटाइन डे का उद्देश्य पूरा हो जाएगा।