ईमानदार..मेहनती...पढ़ाकू बच्चें अखवार बेचकर भी पढ़ लेता है।
इस बच्चे को देखकर...बहुत दिनों से इसके बारे में लिखना चाह रहा था...लेकिन क्या लिखूं और कहाँ से शुरू करू कभी समझ नही आया.....यह बच्चा अखबार बेच कर अपना दैनिक कार्य करता है तश्वीर देखकर सभी वही सोच रहें रहेंगे...लेकिन इसके लिए ये कहना सोचना गलत हैं.... क्योंकि इसके पिता मध्यम वर्गीय परिवार से आते हुए भी इसको शिक्षित करने में सक्षम हैं।
अखबार पढ़ने का आदत तो हमको बचपन से ही था तो सहरसा आने के बाद घर से जो कुछ भी पैसे मिलता था उससे कुछ बचा कर अखबार खरीदता था तो इसके पिता "बबलू जी" तिवारी टोला वाले से सम्पर्क हुआ।व्यवहार के इतने धनी है कि कभी कोई शिकायत नही चाहे अखवार 9 बजे के बाद 10 उसके बाद 12 बजे ही क्योंकि न मिले।
तो अखबार 11 से 12 बजे के बीच ही मिला करता था लेकिन दो महीने से सुबह 7 बजे जगते ही हमको मिल जाया करता था....2011 में बबलू जी ही एकाएक देना शुरू कर दिए थे हमको फिर वही बात याद आया बबलू जी अखबार देना बंद तो नही कर दिए।एक रोज इसको देखा तो जब तक बात करने का कोसिस करता ये जल्दी से अपने काम करके निकल गया ऐसा इसलिए क्योंकि अखबार सबको सबेरे चाहिए और हमको लगा ये अखवार कैसे देगा इतना छोटा बच्चा....कही अखबार मिलना तो बन्द नही हो जाएगा।
दूसरे रोज हमको भी सभी अखवार चाहिए था सबेरे बाहर में थे और ये सामने मिल गया हम बस इसको देखे जा रहे थे क्योंकि ये चेहरा को ढका हुआ था हमको लगा इसको ये काम करने में दिक्कत है या फिर मजबूरी में ही कररहा है...
बोले अखवार हमको आज सभी चाहिए..शायद ये लिमिट में अखवार लेकर निकलता था तो देने से मना कर दिया और बोला मैं बाद में आपको सभी दूंगा अभी नही है...जैसे ही हम पूछे तुम्हारे पापा क्या करते है क्या नाम है उनका उसने बोला "बबलू जी" का नाम लिया तो मेरे दिमाग मे या यूं कहें अधिकतर लोग यही सोचेंगे इसके पिता जी तो ठीक ठाक इनकम वाले लगते है फिर ऐसा क्यों किये ये पढ़ता नही होगा या दूसरा कारण हो सकता इनके पिता जी का माली हालत।
लेकिन उन्होंने किसी रोज हमसे ही कहे थे कि आज अगर आपके बच्चे कुछ नही बना तो आपके मेहनत बेकार है हम जैसे लोग जो ठंडा हो या गर्मी हो या बरसात कुछ भी हो अखवार देना ही होता हैं का सभी मेहनत किसी काम का नही...हम थोड़ा और कष्ट काट ले लेकिन मेरा बच्चा पढ़ेगा।
मुख्य कहानी यहाँ है.....
ये कंफर्म होने के बाद की ये बबलू जी के पुत्र है तो हमने कहाँ तुम पढ़ते क्यों नही हो..पापा तुम्हारे बहुत अच्छे लोग है तुमको पढ़ना चाहिए कोई दिक्कत नही होगा तुमको...उसका जवाब सुनकर हम तो सन्न रह गए..
भैया मेरा अभी 9:45 से 12वीं का एग्जाम है।बस मुँह से निकल गया तुम अब्दुल कलाम तो नही हो...सुने हो उनके बारे में वो बोला हाँ.. मिसाइल मैन थे।अब उससे और कुछ पूछता उससे। समय हो रहा था 8 बजे सुबह सायद तो उसको घर जा कर तैयार होना भी होगा फिर जाएगा परीक्षा देने।
हमने फटाक से अपने पॉकेट में हाथ दिया तो शायद दो सौ रुपये का नोट निकला होगा उसके तरफ देते हुए कह ही रहे थे तुमको आगे सहरसा के किसी भी महाविद्यालय में नामांकन लेना होगा तो हम करवायेंगे ये रख लो...पैसा हाथ मे लिया हुआ उसने पूछा ये पैसे पापा के लिए है न।हमने कहा नही तुम्हारे लिए उसने तुरन्त अपनी साईकल खड़ा किया और हमको उसी स्टाइल में देते हुए बोला हम नही है लेने वाले भैया।हमको जरूरी नही है अभी।
दो चार कहने के बाद हम फिर उससे पैसा लेने नही बोले हम साइड में खड़े हो गए वो चलने लगा फिर साईकल रोकते हुए हमको बोला आपको चारो पेपर क्यों लेना था हम बोले बस यूं ही...उसने बोला लीजिये ये चारों पेपर और आपको अब सबेरे पेपर मिलेगा।
इसतरह एक ईमानदार व्यवहार कुशल पिता और उसके पुत्र ने आज के बच्चों और पिता को सिख दिया कि एक पिता कितना भी धन अर्जित कर ले बच्चों को शुरू से ही सिर्फ लेने की आदत नही लगाया जाए देने की भी आदत लगाया जाए और बच्चों को ये सिखाया कि अपने मेहनत से कुछ पैसे अर्न करके भी पढ़ा जा सकता है।
ये बच्चा अखवार बेचकर...पढ़कर आगे बढेगा ही क्योंकि जब बच्चे को अपनी पिता और परिवार का फिक्र शुरू से हो जाता है तो वो अपने जीवन मे सफल हो कर ही रहता है।
काफी कम समय के कन्वर्सेशन के कारण उसका नाम ही नही पूछ पाया...
अखवार बेचने वाला अखवार के अंदर सायद ही होता है।
#MurariKrMayank
