06 February, 2016

फ्रॉड नौकरियों के लिए आवेदन कर रहें बिहारी छात्र। जाने सच्चाई इस आबेदन का...

आज बिहार के शैक्षणिक हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की हर कोई लूटने वाला बिहार को अपना सुरक्षित पनाहगाह बना रहा है।आज बाजार में मानवाधिकार सेवा शक्ति और प्रधानमन्त्री कोशल विकास योजना के नाम पर दिल्ली के एक संस्थान का आबेदन पत्र मिल रहा है।जो 80000 से ज्यादा व्यक्ति को नौकरी देने की बात कररही है। मानवाधिकार सेवा शक्ति 10 पदों के लिए 16922 सीटो पर बहाली निकाले है जिसका पंजीकृत संखिया 524 US21-1860 है आबेदन पत्र में दिए हेल्पलाइन नंबर भी बन्द आ रहा है मानवाधिकार सेवा शक्ति न तो सरकारी संस्था है न कोई निजी कंपनियां न ही सरकार का कोई अंग तब ये इतनी संख्या में कैसे नौकरी दे सकती है। जो ये आवेदन पत्र फर्जी है वो बताने के लिए काफी है।और छात्रो का शोषण कररही है।
इनके आबेदन भड़ने में आवासीय प्रमाण पत्र के लिए ब्लॉक नही मुखिया और वार्ड सदश्य के द्वारा प्रमाणित प्रमाण पत्र चाहिए। 4रुपया का फॉम 10 रुपया में खरीदना पड़ता है और 15 रूपये का डाक टिकट लगाना पररहा है । इसका भांडा फॉर हो चूका है।
( http://m.jagran.com/bihar/east-champaran-13517733.html )
दूसरी ओर प्रधानमन्त्री कोशल विकाश योजना के नाम पर देल्ही के D P M I नामक एक संस्थान ( www.dpmiindia.com) प्रशिक्षण के बाद 15000 से 30000 देने की दावा करती है शुल्क नही है लेकिन 2 रुपया के फॉम को 10 रुपया में बेचा जा रहा है । जिससे इस संसथान को लाखो के कमाई हो गयी है।
प्रधानमन्त्री कोशल विकास योजना के तहत हर जिले में एक अधिकृत केंद्र खोला गया है जहाँ हर कोई आवेदन भर कर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है।
50 हजार से ज्यादा छात्र फॉम को भड़ चुके है जिसमे ग्रामीण छात्रो की संखिया अधिक है। शहरी क्षेत्र से ज्यादा ग्रामीण छात्र प्रभावित हुए है। दिलचस्प बात तो ये है की आवेदन भड़ने की न्यूनतम योग्यता इंटर पास है और कोई भी नौकरी के लिए न्यूनतम आयु 18 साल होता है। और उसे गलत सही आवेदन में फर्क नही दिखता है। सरकार 18 साल के लड़को लड़की को एक जिम्मेदार नागरिक मानती है।तो उन छात्रो के योग्यता पर भी ऊँगली उठना लाजमी है। जिसका जिम्मेवार छात्रो के साथ साथ बिहार सरकार भी है।
बर्तमान बिहार सरकार बिहारियो को शिक्षा देना ही नही चाहती है। शिक्षक पात्रता परीक्षा फ़ेल शिक्षक आज स्कूल में पढ़ा रहे है। स्कूल कॉलेज में शिक्षकों के संखिया नगण्य है। बिहार सरकार की

बिहार सरकार अपनी विभिन्न योजना जनता को दिखती है। शिक्षा के क्षेत्र में कोई योजना नही दिखती है। केंद्र सरकार के दिए राशि को गलत बताने के लिए सरकारी विज्ञापन निकलने की करोड़ो पैसे है।  लेकिन शिक्षा के नाम पर कुछ नही है बिहार सरकार को,
नीतीश जी को पत्ता है की अगर बिहारी पढ़ लिख लिया तो हम जैसे लोगों का बिहार से पत्ता साफ है। उनका अंग्रेजो के जैसे एक ही सोच है कि न पढ़ने देंगे न बढ़ने देंगे।
आज बिहार सरकार के प्रसाद से हमलोगो को फ्रॉड नोकरी के लिए मार करना पररहा है।आज सरकारी शिक्षण संस्थान सिर्फ दिखावे के लिए है न तो वहा शिक्षको की संखिया है न ही पढाई की समुचित ब्यबस्था।
सिर्फ अरबों का बजट कॉलेजों को मिलता है चाहे वहा कोई काम हो या नही हो।
माननीय मुख्यमंत्री जी आज के दौर में बिहारी में शिक्षा की कोई कमी नही है जरूरत है उसे सही रास्ते दिखाने की।आप सभी योजना को बंद कर अगर शिक्षा व्यबस्था को मजबूत कर देते है तो बिहार की गरीबी तंगहाली सब कुछ दूर हो सकती है सबको पत्ता है शिक्षा ही सभी समश्याओ का हल है तो शिक्षा व्यबस्था को मजबूत करें। कुछ सौ वर्ष पूर्व बिहार पुरे विश्व को अपनी शिक्षा दिया करती थी लेकिन आज अपने बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध नही करवा पा रही है। जिसकी वजह आप है।
बिहार में बहार तब ही आ सकती है जब हर कोई शिक्षित हो। आज आप छात्रो को दलित महादलित बना दिए लेकिन उनको दलित महादलित के अलावे कुछ नही दिए।
हमारे प्यारे छात्र बन्धु सोच समझ क्र आगे बढ़ो क्योकि तुझे लूटने वाले दरिंदे हर एक पग पर खड़े है।
मुरारी कुमार मयंक
जिला संयोजक
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद। सहरसा
मोबाइल - 9473329336
Email - murarijha.shc@gmail.com