HAPPY DURGA PUJA BY - MURARI KUMAR JHA , BARGAON SAHARSA BIHAR 9661037336
दुर्गा पूजा सिर्फ़ मिथ की पूजा नहीं, बल्कि स्त्री की ताक़त, सामर्थ्य और
उसके स्वाभिमान की एक सार्वजनिक 'पूजा' है। क्या विडंबना है कि आज दुर्गा
पूजा, दुर्गाशप्तशती, दुर्गा स्त्रोत का पाठ उन धर्मभीरू घरों में ज़्यादा
किया जाता है, जिन घरों में आज स्त्रियाँ ज़्यादा डरी और असुरक्षित हैं।
वहाँ पुरुषों के रूप में महिषासुर रोज़ उनका मर्दन करता है। उन पर
अत्याचार, ताड़ना और यातना के कोड़े बरसाता है। इस कारण हमारे समाज में आज
दुर्गा के चेहरे कम दिखते हैं। देव-दासियों के ही असंख्य कातर चेहरे
ज़्यादा दिखते हैं। ऐसे घरों में रोज़ दुर्गा पूजा नहीं, बल्कि पुरुष पूजा
का अनुष्ठान संपन्न होता है। समाज और हमारे पारिवारिक जीवन में बढ़ती यह
प्रवृत्ति दुर्गा पूजा का उपहास नहीं तो और क्या है? आज दुर्गा पूजा के
निहितार्थ को समझने की आवश्यकता है