03 October, 2013

तुम और मैं एक दूसरे को नहीं जानते हैं. हम कभी ना मिल हों या एक साथ कभी हंसी मजाक न किया हो. हो सकता है कि हमने कभी एक साथ डांस न किया हो और न ही आधी रात को एक साथ उबासी ली हो. लेकिन इन सब बातों की मेरे लिए कोई अहमियत नहीं है. ये बहुत छोटी और बेमतलब बातें हैं. बल्कि मैं तुमसे ये कहना चाहती हूं कि तुम बहुत प्यारे हो. तुम बहुत कीमती हो. तुम्हारे हाथ बड़ी बड़ी चीजों के लिए बने हैं.

तुम शायद सोचोंगे कि मै पागल हूं. हो सकता है कि तुम ये खत हाथ में लिए बैठे हो और मेरे बारे में सोच रहे हो, लेकिन तुम नहीं जान सकते.. तुम मुझे नहीं जानते हो.. तुम मुझे रत्ती भर भी नहीं जानते हो. हां. तुम्हारी बात सही है. लेकिन मैं सब कुछ जानती हूं. मैं सोचती थी कि मैं इसके काबिल नहीं हूं. मैं जानती हूं कि कभी खुद को प्यार करना और अपनी कद्र करना मेरे लिए कितना मुश्किल था. मेरे लिए खुद को आइने में देख पाना भी मुश्किल हो जाता था. और मुझे पता है कि मैं अकेली नहीं हूं जिसे सहारे और समर्थन की जरूरत पड़ती है. मैं जानना चाहती हूं कि कहीं तो कोई होगा जिसे मेरी परवाह हो.

तुम मेरे लिए बहुत अहमियत रखते हो. मैं बता नहीं सकती हूं, लेकिन तुम मेरे लिए बहुत अहम हो. और तुम, तुम बहुत ही अच्छे हो. तुम और तुम्हारे सारे हिस्से.
लव
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,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,MURARI KUMAR JHA ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,